होम › Chhattisgarh › आपको भी नहीं पता है अपने पितरों की तिथि तो जानिए क्या है इसका समाधान
Chhattisgarh

आपको भी नहीं पता है अपने पितरों की तिथि तो जानिए क्या है इसका समाधान

WhatsApp Facebook
आपको भी नहीं पता है अपने पितरों की तिथि तो जानिए क्या है इसका समाधान

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

रायपुर: पितृपक्ष अपने पूर्वजों के प्रति अपनी आस्था को समर्पित करने का पर्व माना जाता है. जहां तर्पण और पिंडदान दिया जाता है. शास्त्रों में कहते हैं कि इस समय किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है, लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें उनके पितरों की तिथियों के बारे में नहीं पता. उन्हें नहीं ज्ञात है कि उनके माता-पिता की मृत्यु किस तिथि पर हुई है और उन्हें पिंडदान किस तिथि पर करना चाहिए. कई बार ये जानकारी ना होना उनको कन्फ्यूजन की स्थिति में डालता है, जिससे वे पितृ दोष के भागी बनते हैं, लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है. हम आपको बताएंगे कि जानकारी न होने पर भी किस तिथि पर पिंडदान कर सकते हैं और पिंडदान, तर्पण आपके पूर्वजों को कैसे मिलेगा?

IMG-20260929-WA0039-240x300 आपको भी नहीं पता है अपने पितरों की तिथि तो जानिए क्या है इसका समाधान

दरअसल, पितृ पक्ष में अपनों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है, लेकिन बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपनों की तिथि नहीं पता है. न ही उन्हें ये जानकारी है कि वह कब उनका तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं? शास्त्रों में कहा जाता है कि बिना तिथि के किए गए पिंडदान का फल नहीं मिलता. यही नहीं, यदि शास्त्र के नियमों को जानें बिना पितृपक्ष का श्राद्ध कर्म किया जाए तो वह तर्पण, तर्पण शास्त्र सम्मत नहीं होता. ऐसे में क्या तिथियां होंगी, उनके लिए क्या नियम होने चाहिए.

 

तिथि नहीं मालूम, तो कब और किस दिन पिंडदान: श्राद्ध को किसी क्रिया से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, बल्कि ये एक श्रद्धा होती है. इसीलिए इसको श्राद्ध कहते हैं. कहा जाता है कि इस समय हम अपनी श्रद्धा के साथ अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके प्रति अपने कृतज्ञ को व्यक्त करते हैं.

 

इस कारण 15 दिन पितृ सीधे पृथ्वी पर आते: धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ कहां रहते हैं, जो उन्हें इस समय ही याद करते हैं? वो कहते हैं कि चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर पितरों का वास निवास स्थान बताया गया है. जब कन्या राशि के सूर्य होते हैं, तब चंद्रमा पृथ्वी की तरफ झुक कर निकट आ जाता है, जिससे वहां का संबंध पृथ्वीवासी से सीधे जुड़ जाता है.ऐसे में 15 दिन पितृ सीधे पृथ्वी पर आते हैं और वह घर-घर जाकर उस स्थान को देखते हैं, जहां वह रहे हैं. जहां वह पले-बढ़े हैं और अपने वंश को देखते हैं. वो समझते हैं कि उनके प्रति उनकी क्या भावना है और जब ये उनका पालन नहीं होता तो वह कष्ट का अनुभव करते हुए लौट जाते हैं. ऐसे में धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि पितरों के निवृत श्रद्धा अर्पित करते हुए पितृपक्ष में उन्हें तर्पण जरूर करना चाहिए.

 

इस दिन माता-पिता का करते श्राद्ध: इसके लिए सबसे पहले जिन्हें तिथियां ज्ञात हैं, उन्हें तिथि पर ही तर्पण करना चाहिए. लेकिन जिनको तिथियां ज्ञात नहीं हैं. उनके लिए भी धर्मशास्त्र में नियम बताए गए हैं. सबसे पहले माता और पिता की तिथियां जानते हैं. उन्होंने बताया कि, किसी की माता की मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो और उन्हें तिथि की जानकारी नहीं है तो लोग उनका श्राद्ध मातृ नवमी के दिन कर सकते हैं. इस बार मातृ नवमी 4 अक्टूबर को पड़ रही है, जहां व्यक्ति तर्पण, पिंडदान करने के साथ ब्राह्मणों को भी दान कर सकता है.

वहीं यदि किसी व्यक्ति के पिता की मौत हो गई है और उन्हें तिथि का ज्ञान नहीं है तो वह अमावस्या यानी कि 10 अक्टूबर को उनका श्राद्ध कर्म कर सकते हैं. उन्हें अन्य तिथियों को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है.

 

अकाल मृत्यु पर इन तिथियों पर करें पिंडदान: पंडित पवन त्रिपाठी कहते है कि यदि किसी भी तिथि पर हुई आत्महत्या, किसी हथियार, ज़हर देकर हुई मौत यानी कि अकाल मृत्यु है तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी पर किया जाता है. इस बार चतुर्दशी 9 अक्टूबर को पड़ेगी. वहीं यदि कोई सामान्य मृत्यु हुई है, तो ऐसे लोगों का पिंडदान द्वादशी तिथि को किया जाता है और इस बार द्वादशी तिथि 7 अक्टूबर को पड़ेगी. उन्होंने बताया कि यदि चतुर्दशी तिथि पर किसी व्यक्ति की सामान्य मृत्यु हुई है तो उसका भी पिंडदान द्वादशी तिथि पर ही किया जाएगा.

 

 

इस दिन करें संन्यासियों का पिंडदान

साधु, संन्यासियों का पिंडदान द्वादशी पर 7 अक्टूबर को ही किया जाएगा. उन्होंने बताया कि आमतौर पर जो संन्यासी होते हैं, वह अपना पिंडदान पहले ही कर चुके होते हैं, लेकिन फिर भी द्वादशी और अमावस्या के दिन उनका पिंडदान किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म का दिन तय किया गया है और शास्त्रीय नियमों के अनुसार ही पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण करना चाहिए.

 

 

ऐसे करें तर्पण: ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि जो लोग पहली बार पितृपक्ष में श्राद्ध या तर्पण कर रहे हैं, उन्हें कुछ बातें नहीं मालूम होती हैं, तो उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है. व्यक्ति अपने श्रद्धा कृतज्ञता के साथ सबसे पहले अपने पूर्वजों को तर्पण दें. इसके लिए प्रातः काल स्नान करके हाथ में कुशा पहनकर पानी में तिल डालकर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने हाथ की तर्जनी और अंगूठा ऊंगली के जरिए, स्वधा कहने के साथ अपने पूर्वजों का नाम लेकर जल दिया जाता है. इसके उपरांत उन्हें भोजन निकाला जाता है. उन्होंने कहा कि इस समय तामसिक प्रवृत्ति का भोजन नहीं करना चाहिए, इसके साथ ही दाढ़ी, बाल नहीं बनवाना चाहिए.

 

 

ऐसे करें अपने पितृ को प्रसन्न: पंडित पवन त्रिपाठी ने बताया कि इसके साथ ही यदि अपने पितरों को प्रसन्न करना चाहें तो आप अपने घर के बाउंड्री वॉल पर तिल जरूर छिड़क सकते हैं. साथ ही निकले भोजन में भी तिल जरूर रखना चाहिए. इसके साथ ही अपने घर के दरवाजे पर प्रत्येक दिन एक बत्ती में तिल का तेल डालकर दीप जरूर जलाना चाहिए. इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है. कहते हैं कि पितृ पक्ष में ब्राह्मणों को दान का भी विशेष विधान है और ब्राह्मणों से पिंडदान का कार्य कराना चाहिए और दान देना बेहद महत्वपूर्ण है.

The post आपको भी नहीं पता है अपने पितरों की तिथि तो जानिए क्या है इसका समाधान appeared first on Ekhabri.com.

Source: Ekhabri

Ekhabri
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
मूल लेख पढ़ें ↗
दोस्तों के साथ साझा करें
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)