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आज मंगला गौरी और प्रदोष का है शुभ संयोग, जानिए कैसे मिलेगी मां की कृपा 

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आज मंगला गौरी और प्रदोष का है शुभ संयोग, जानिए कैसे मिलेगी मां की कृपा 

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हिंदू धर्म में मंगला गौरी व्रत का विशेष और अत्यंत पवित्र स्थान है. सावन के मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत किया जाता है. इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और अविवाहित कन्याएं करती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.

IMG-20260825-WA0006-169x300 आज मंगला गौरी और प्रदोष का है शुभ संयोग, जानिए कैसे मिलेगी मां की कृपा 

अनुसार, इस बार सावन का आखिरी और चौथा मंगला गौरी व्रत आज यानी 25 अगस्त को किया जा रहा है. इस बार मंगला गौरी व्रत के दिन प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है. प्रदोष व्रत भगवान शिव को और मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित है. अब आप सोच रहे होंगे कि एक साथ दोनों व्रत कैसे करें.

 

प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 अगस्त को प्रातः 06 बजकर 20 मिनट से होगी.वहीं, इस तिथि का समापन 26 अगस्त को प्रातः 07 बजकर 59 मिनट पर होगा, ऐसे में 25 अगस्त को ही प्रदोष व्रत किया जाएगा. इस दिन शिव पूजा का सही समय शाम को 07 बजकर 49 मिनट से 09 बजकर 57 मिनट तक है। यह व्रत मंगलवार के दिन रखा जा रहा है, इसी वजह से इसे भौम प्रदोष कहा जाता है.

 

मंगलवार को प्रदोष होने से बनता है भौम प्रदोष : प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है. सप्ताह के जिस दिन प्रदोष तिथि पड़ती है, उसी के अनुसार उसका नाम और धार्मिक महत्व माना जाता है. मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है. उन्होंने बताया कि मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है और इस दिन भगवान शिव की आराधना करने की विशेष धार्मिक मान्यता है. भौम प्रदोष पर शिव पूजा के साथ मंगल से संबंधित दोषों और जीवन में आने वाली बाधाओं के निवारण की कामना की जाती है.

 

सावन और प्रदोष का संयोग

 

सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है. सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है. वहीं प्रदोष काल भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष समय माना जाता है. ऐसे में सावन के दौरान पड़ रहा भौम प्रदोष शिव भक्तों के लिए विशेष धार्मिक अवसर लेकर आया है. मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर दिनभर भगवान शिव का स्मरण करते हैं और शाम को प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं.

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Source: Ekhabri

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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