रायपुर में यूनिसेफ की स्तनपान पर कार्यशाला हुई
रायपुर, 23 जुलाई 2026।मातृ एवं शिशु पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यूनिसेफ द्वारा रायपुर में “विश्व स्तनपान सप्ताह एवं स्वस्थ आहार” विषय पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। होटल सयाजी में आयोजित इस कार्यशाला में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्तनपान, स्वस्थ आहार और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला के दौरान यूनिसेफ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अनिल गुलाटी ने कहा कि मीडिया केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण भी है। उन्होंने बताया कि तथ्य आधारित रिपोर्टिंग से समाज में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है और परिवारों को सही व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
यूनिसेफ की न्यूट्रिशन स्पेशलिस्ट डॉ. अपर्णा देशपांडे ने स्तनपान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सबसे संपूर्ण आहार है, जो जन्म के बाद पहले छह महीनों तक उसकी सभी पोषण आवश्यकताओं को पूरा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सफल स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में आईएमएस अधिनियम, 1992 की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून स्तनपान को बढ़ावा देने और शिशु दूध विकल्पों के अनुचित प्रचार को रोकने के लिए बनाया गया है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि व्यावसायिक बेबी फूड का प्रचार-प्रसार सीमित होना चाहिए और स्तनपान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के उप संचालक डॉ. बी.आर. भगत ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कार्यशाला में स्वस्थ आहार पर भी चर्चा हुई, जिसमें स्थानीय और घर के बने ताजे भोजन को सर्वोत्तम विकल्प बताया गया। विशेषज्ञों ने जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से सावधान रहने की सलाह दी और उपभोक्ताओं को न्यूट्रिशन लेबल पढ़ने के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों और विशेषज्ञों के बीच स्तनपान, पूरक आहार और पोषण से जुड़ी भ्रांतियों पर सार्थक संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रमाण-आधारित पत्रकारिता के जरिए समाज में स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
यह कार्यशाला 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले विश्व स्तनपान सप्ताह के पूर्व आयोजित की गई। यूनिसेफ ने इस अवसर पर मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार के लिए मीडिया, सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
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Source: Ekhabri


