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महुआ से बदली किस्मत, महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

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महुआ से बदली किस्मत, महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

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रायपुर। जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड की पहल ‘वन धन विकास केंद्र योजना’ छत्तीसगढ़ में ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। वर्ष 2018 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य लघु वनोपज एकत्र करने वाले समुदायों को प्रशिक्षण देकर उन्हें उद्यमी बनाना और स्थायी आजीविका प्रदान करना है।

IMG-20260806-WA0013-225x300 महुआ से बदली किस्मत, महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाला महुआ अब महिलाओं के लिए आय का मजबूत साधन बन गया है। योजना के तहत महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी आमदनी में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

 

कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र बना सफलता का उदाहरण

राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का प्रभावी उपयोग करते हुए नई मिसाल पेश की है। पहले जहां वे केवल महुआ का संग्रह करती थीं, वहीं अब प्रशिक्षण के बाद वे महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। आधुनिक तकनीक और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है।

 

कौशल विकास से मिली नई पहचान

वन धन केंद्रों में महिलाओं को केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन की भी जानकारी दी जाती है। इससे वे बाजार की मांग के अनुसार बेहतर उत्पाद तैयार कर रही हैं और उन्हें उचित मूल्य भी प्राप्त हो रहा है।

 

मूल्यवर्धन से बढ़े रोजगार के अवसर

महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। अब महिलाएं कच्चे महुआ को बेचने के बजाय उससे लड्डू, कुकीज, जैम और एनर्जी बार जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ गई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

 

*छत्तीसगढ़ हर्बल्स से मिल रहा बाजार*

महुआ से बने इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद संघ द्वारा संचालित है, जिसके तहत वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, महुआ उत्पाद और आयुर्वेदिक उत्पादों को महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार कर बाजार में बेचा जाता है।

 

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

कोरिनभाठा की महिलाओं की यह सफलता दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन सहयोग मिलने पर वन संपदा को रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। वन धन विकास केंद्र योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।

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Source: Ekhabri

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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