पटना में असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों का लोकभवन मार्च, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ी; पुलिस से झड़प

पटना। बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियमों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को लोकभवन मार्च निकाला। गर्दनीबाग से आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग की। बेली रोड और आर ब्लॉक के पास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की।
नई नियमावली का विरोध
प्रदर्शनकारी बिहार सरकार की सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि नई नियमावली बिहार के छात्रों और शोधार्थियों के हित में नहीं है। उनका कहना है कि करीब 30 साल में बिहार के विश्वविद्यालयों में सिर्फ तीन बार सहायक प्राध्यापकों की स्थायी बहाली हुई है। ऐसे में संविदा नियुक्ति का प्रावधान उचित नहीं है।
उम्र सीमा 55 साल रखने की मांग
अभ्यर्थियों ने कहा कि नई नियमावली में अधिकतम उम्र सीमा 55 से घटाकर 40 वर्ष कर दी गई है। इससे लंबे समय से अतिथि शिक्षक के तौर पर काम कर रहे अभ्यर्थियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने उम्र सीमा 55 वर्ष रखने और UGC के टेबल 3A के आधार पर स्थायी नियुक्ति की मांग की है। रिसर्च पब्लिकेशन के अंक हटाने का भी विरोध किया जा रहा है।
19 दिन से आमरण अनशन
संगठन के मुताबिक, 19 दिनों से चल रहे आमरण अनशन में तीन शोधार्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इनमें से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।
सांसद पप्पू यादव ने दिया समर्थन
सांसद पप्पू यादव ने आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “शोधार्थी हमारे शिक्षा और ज्ञान की रीढ़ हैं। उनके सम्मान, अधिकार, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों को संघर्ष या विरोध के रूप में देखने के बजाय सरकार को संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और तत्काल वार्ता कर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए।”
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
प्रदर्शन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। आर ब्लॉक चौराहे पर डबल लेयर बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और उसे हटाने की कोशिश की। करीब डेढ़ घंटे चले प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी पीछे हट गए और कुछ को पुलिस ने हिरासत में लिया।
अतिथि शिक्षकों को भविष्य की चिंता
प्रदर्शन में शामिल डॉ. नितिन कुमार ने कहा कि उन्हें 11 महीने के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन वे पिछले 8 साल से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। वहीं डॉ. निखिल कुमार ने कहा कि यह आंदोलन आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए है। आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। सांसद चिराग पासवान ने भी Ph.D. होल्डर्स की मांगों का समर्थन किया है।
Source: Asian News Bharat


