जीवन सूक्त : संसार की असारता समझने के लिए भी, आवश्यक है एक संसार – संदीप अखिल
जीवनभर कुछ पाने की दौड़ में लगा रहता है मनुष्य। बचपन में अच्छे अंक, युवावस्था में करियर, फिर पद, प्रतिष्ठा,
साभार: Lalluram
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated)
Lalluram


