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छत्तीसगढ़ की बेस्ट प्रैक्टिस को राष्ट्रीय पहचान, आवास योजना में सम्मान

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छत्तीसगढ़ की बेस्ट प्रैक्टिस को राष्ट्रीय पहचान, आवास योजना में सम्मान

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रायपुर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। EWS-LIG वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत Affordable Housing in Partnership (AHP) मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन को भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में सम्मानित किया है।

 

विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), सुमित अग्रवाल ने पुरस्कार ग्रहण किया।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। सरकार का जोर ऐसे आवास उपलब्ध कराने पर है, जहां परिवारों को घर के साथ सड़क, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं भी मिल सकें।

 

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति से लेकर भूमि उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता तक विभिन्न स्तरों पर निगरानी की जा रही है।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA और नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा AHP मॉडल के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की पहल राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि पक्का घर केवल चार दीवारों और छत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध हो।

 

छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में निजी कॉलोनियों में EWS और LIG वर्ग के लिए भूमि आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल है। इस व्यवस्था के तहत राज्य में 25,413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है।

 

इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत 17,790 और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत 7,623 आवास शामिल हैं। इस पहल से शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास निर्माण हेतु भूमि की उपलब्धता की बड़ी चुनौती को दूर करने में मदद मिली है।

 

इस व्यवस्था की खासियत यह है कि कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के आवास केवल शहरों के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन सकेंगे। इससे लाभार्थी परिवारों को सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी आवश्यक शहरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

 

राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत AHP मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।

 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और SUDA ने नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर ऐसी कार्यप्रणाली विकसित की है, जिससे शहरी गरीब परिवारों के लिए किफायती आवास निर्माण को गति मिली है। इसी समग्र व्यवस्था को भारत सरकार ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है।

 

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ के ठोस प्रयासों की पहचान है।

 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। EWS-LIG वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और AHP मॉडल को मिला राष्ट्रीय सम्मान इसी कार्यप्रणाली का परिणाम है।

 

अरुण साव ने कहा कि विभाग का लक्ष्य शहरों में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराना है। यह राष्ट्रीय सम्मान पूरी टीम को बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित करेगा और साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

 

छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां आवास निर्माण के लिए जमीन की समस्या का समाधान हुआ है, वहीं कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी तैयार हुआ है।

 

विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान ‘सबके लिए आवास’ के लक्ष्य को जमीन पर उतारने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली को मिली राष्ट्रीय पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।

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साभार: Ekhabri

Ekhabri
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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